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The Prasthānatrayī are the “three sources”, “three institutes” or “three canonical texts” of Vedānta school of Indian Philosophy.

Dr. Janakisharan Acharya

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Sun 03 Jan 2021

6:00 PM - 7:30 PM (UTC+5.5)

Event Type: Date

प्रस्थानत्रयी विमर्श: : An Introduction in Hindi to Prasthanatrayi of Vedanta

भारतीय दर्शन शास्त्र में प्रमुख रूप से तीन ग्रन्थ उपनिषत्, भगवद् गीता एवं ब्रह्मसूत्र “प्रस्थान-त्रयी” के नाम से विख्यात है। ये ग्रन्थ सम्मत विषयों पर अन्तिम प्रमाण संस्थापित करते हैं और इन तीनों ग्रन्थों में परस्पर वैचारिक विरोध नहीं है। अतः वेदान्त दर्शन में प्रस्थान-त्रयी के माध्यम से ही किसी सिद्धान्त को सिद्ध किया जाता है। यदि किसी सिद्धान्त को प्रस्थानत्रयी द्वारा सिद्ध नहीं किया जाता है तो वह सिद्धान्त मान्य नहीं होता है। इसीलिये प्रस्थानत्रयी भाष्य द्वारा भगवान् शङ्कराचार्य, रामानुजाचार्य, निम्बार्काचार्य, वल्लभाचार्य आदि आचार्यों ने अपना-अपना सिद्धान्त प्रस्थानत्रयी पर भाष्य लिखकर सिद्ध किया।
इस प्रस्थानत्रयी में प्रवृत्ति और निवृत्ति दोनों मार्गों का तात्त्विक विवेचन है। ये वेदान्त के तीन मुख्य स्तम्भ माने जाते हैं। प्रस्थान तीन है – १. श्रुति प्रस्थान, २. स्मृति प्रस्थान, ३. न्याय प्रस्थान। प्रत्येक प्रस्थान में स्वतन्त्र ग्रन्थ हैं, जैसे श्रुति प्रस्थान में उपनिषद् है, स्मृति प्रस्थान में भगवद्गीता और न्याय प्रस्थान में ब्रह्मसूत्र है। इन तीनों का तात्पर्य एक ही अद्वितीय ब्रह्म का प्रतिपादन करने में है।

Weekend with Wisdom की इस व्याख्यान शृङ्खला में प्रस्थानत्रयी की अवधारणा एवं परिचय पर संवाद प्रस्तुत किया जायेगा।

The Prasthānatrayī are the “three sources”, “three institutes” or “three canonical texts” of Vedānta school of Indian Philosophy. Vedānta Philosophy acknowledges the Prasthānatrayī as its three authoritative primary sources. These three texts Upaniṣads, Bhagavad Gītā, and Brahma Sūtras. These three texts are called as Śruti Prasthāna (Śruti – that which is heard), Smr̥ti Prasthāna (Smr̥t – that which is remembered) and Nyāya Prasthāna (Nyāya – Logoc/order).

Vedānta school is based on Brahma Sūtras of Bādarāyana. Ādi Śaṅkara has established the concept of Prasthānatrayī, the epistemic references based on Śāstra pramāṇam in Vedānta Philosophy. Along with Brahma Sūtras, Upaniṣads are considered from Vedas and Bhagavad Gītā is chosen from Mahābhārata, which is Itihāsa (i.e. part of Smr̥ti). The Prasthānatrayī has been accepted by all other Acāryas of other Vedānta schools such as Rāmānuja, Madhwa, Nimbārka, Vallabha etc.

In this lecture series of Weekend with Wisdom, a dialogue on the concept and introduction of the Prasthānatrayī will be presented by the speaker.

Speakers
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Dr. Janakisharan Acharya

Teacher

Dr. Janakisharan Acharya works as Assistant Professor at P.G. Department, Shree Somnath Sanskrit University, Veraval.